Saturday, May 19, 2012
[11 May 2011 | No Comment | 651 views]
The Third Haryana International Film Festival was organised with gusto from 1st to 7th October 2010 in Yamunanag.  
[8 May 2011 | One Comment | 1,226 views]
Now, small towns get a taste of world and regional cinema Namrata Joshi Small Town Cinema Haryana International Film Festival, organised by journalist Ajit Rai in association with DAV College for Girls, Yamunanagar, held for the third year running. Similar festivals planned in 10 other Haryana towns. After the success of its Cinema of Resistance festival in Gorakhpur in 2006, Jan Sanskriti Manch has organised five film festivals in Gorakhpur, one in Bareilly, one in Allahabad, two in Bhilai, one in Nainital, besides three in Lucknow and another in Patna. Plans to have festivals in Ara, Bhojpur, Azamgarh, Gonda, Ashoknagar, Jabalpur, Patiala, Chandigarh, Udaipur, Pithoragarh, Almora, Dehradun, Srinagar (Uttarakhand). Dainik Jagran group’s Jagran film festival held in Kanpur, Allahabad, Benares, Agra, Meerut, Dehradun, Jalandhar, Ludhiana, Patna, Ranchi and Jamshedpur International film fests organised in Jaipur and Ahmedabad *** “We have never seen such realistic, song-less films before,” says Radhika Sharma, a wide-eyed mass communications student from Doaba College, Jalandhar. The word ‘never’, in fact, pops up again and again in our chats with college students from Jalandhar, Kurukshetra, Sonepat, Khanpur…
[8 May 2011 | No Comment | 510 views]
Exclusive interview with Mr. Shriram Tiwari, Director Culture, Madhy Pradesh
[16 Jan 2011 | One Comment | 459 views]
कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्‍यक्ष सुप्रसिद्ध अशोक वाजपेयी से अजित राय की बातचीत इस रविवार 16 जनवरी 2011 को आप 70 साल के हो रहे हैं। लगभग 50 साल की रचना यात्रा करने के बाद क्‍या आप वरिष्‍ठता के अहसास से भरे हुए हैं? अशोक वाजपेयी: मुझे तो लग ही नहीं रहा है कि मैं 70 साल का हो गया। सक्रियता, इच्‍छा, अध्‍यवसाय और श्रम में कोई कमी नहीं महसूस करता। थका भी नहीं हूं, मुझे वरिष्‍ठ होने का तो कतई अहसास नहीं होता।   आप जीवन भर लोगों को पुरस्‍कार देते और दिलवाते रहे हैं। अभी उत्‍तर प्रदेश सरकार ने अपना सर्वोच्‍च पुरस्‍कार ‘भारती भारती’ आपको देने का फैसला किया है। मुख्‍यमंत्री मायावती ने 106 पुरस्‍कारों में से केवल 3 पुरस्‍कारों के निर्णय को स्‍वीकृति दी है । अब क्‍या इसका कोई राजनैतिक मतलब भी है? अशोक वाजपेयी: यह पुरस्‍कार उत्‍तर प्रदेश हिन्‍दी संस्‍थान प्रदान करता है । इसे सरकार के राजनैतिक आग्रहों से जोड़ना ठीक नहीं है । यह संयोग है कि उत्‍तर प्रदेश की मुख्‍यमंत्री मायावती संस्‍थान की अध्‍यक्ष हैं। वैसे भी इतनी बड़ी संख्‍या में…
[3 Dec 2010 | 2 Comments | 613 views]
पणजी, गोवा, 2 दिसम्‍बर गौतम घोष की फिल्‍म ‘मोनेर मानुष’ को सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍म का पुरस्‍कार प्रदान किया गया है। उन्‍हें इस फिल्‍म के लिए भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में स्‍वर्ण मयूर, प्रशस्ति पत्र और  20 लाख रुपये तथा इस फिल्‍म के निर्माता को भी 20 लाख रुपये प्रदान किये गये। इसके साथ ही कौशिक गांगुली की बांगला फिल्‍म ‘जस्‍ट एनादर लव स्‍टोरी’ को 15 लाख रुपये का विशेष ज्‍यूरी अवार्ड प्रदान किया गया है। यह अवार्ड इस फिल्‍म के साथ संयुक्‍त रूप से न्‍यूजीलैंड के निर्देशक टायका वैटिटी की फिल्‍म ‘बॉय’ को दिया गया। पुरस्‍कार पाने के बाद सुपरिचित फिल्‍मकार गौतम घोष ने खुशी जाहिर करते हुए कहा यह पुरस्‍कार धार्मिक कट्टरता, असहनशीलता और हिंसा से घिरे हुए हमारे समाज में शांति, सह-अस्तित्‍व और धर्म निरपेक्षता की स्‍वीकृति है। भारत के अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह में 10 साल बाद किसी भारतीय फिल्‍म को पुरस्‍कार मिला है। इससे पहले वर्ष 2000 में जयराज की फिल्‍म ‘करूणम’ को पुरस्‍कृत किया गया था। सर्वश्रेष्‍ठ निर्देशक का पुरस्‍कार डेनमार्क की फिल्‍म ‘इन ए बैटर वर्ल्‍ड’ के लिए सुसैन बीयर को दिया गया…
[2 Dec 2010 | No Comment | 518 views]
प्रेमकथाएं पणजी, गोवा, 2 दिसम्‍बर भारत के 41वें अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह के प्रतियोगिता खंड में दिखाई गई पौलेंड के सुप्रसिद्ध फिल्‍मकार जान किदावा ब्‍लोंस्‍की की नई फिल्‍म ‘लिटल रोज’ एक दिलचस्‍प प्रेम कथा का त्रिकोण है। जिसमें इतिहास की कुछ कटु स्‍मृतियां शामिल हैं। इजरायल ने 1968 में जब फिलिस्‍तीन पर हमला किया था तो पौलेंड के कम्‍युनिस्‍ट शासकों ने इस अवसर का इस्‍तेमाल यहूदी और कई दूसरी राष्‍ट्रीयताओं वाले नागरिकों को देशनिकाला देने में किया था। उसी दौरान 1968 के मार्च महीने में पौलेंड की राजधानी वारसा में अभिव्‍यक्ति की आजादी को लेकर लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और विश्‍वविद्यालयों के छात्रों ने एक बड़ा आंदोलन किया था जिसे सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया। इसी पृष्‍ठभूमि में कम्‍युनिस्‍ट सुरक्षा सेवा का एक सीक्रेट एजेंट रोमन अपनी प्रेमिका कैमिला को एक सत्‍ता विरोधी लेखक एडम के पीछे लगा देता है। जिस पर शक है कि वह यहूदी है। एडम एक प्रतिष्ठित लेखक है और लगातार शासन की तानाशाही के खिलाफ आंदोलन का समर्थन करता है। कैमिला उसकी जासूसी करते हुये अंतत: उसके प्रेम में पड़ जाती है क्‍योंकि उसे लगता…

It’s a hat trick!

The Third Haryana International Film Festival was organised with gusto from 1st to 7th October 2010 in Yamunanag.

 

The Less Visible

Now, small towns get a taste of world and regional cinema
Namrata Joshi
Small Town Cinema

Haryana International Film…

संस्‍कृति से बढ़कर कोई राजनीति नहीं

Exclusive interview with Mr. Shriram Tiwari, Director Culture, Madhy Pradesh

विस्‍मृति के गर्त में अकेले जा रहे हैं हम

कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्‍यक्ष सुप्रसिद्ध अशोक वाजपेयी से अजित राय की बातचीत
इस रविवार 16 जनवरी 2011…

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